CGBSE Board Exam Helpline: छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए हेल्पलाइन शुरू, अब दूर होगा तनाव

छत्तीसगढ़ में बोर्ड परीक्षाओं की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, छात्रों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होने लगी हैं। इसी मानसिक दबाव को कम करने और छात्रों की शंकाओं को दूर करने के लिए CGBSE Board Exam Helpline सेवा आज से आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी गई है। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने इस बार खास तैयारी की है ताकि दूर-दराज के गांवों में बैठे छात्रों को भी विषय विशेषज्ञों की सलाह मिल सके। यह हेल्पलाइन न सिर्फ विषयों की गुत्थियां सुलझाएगी, बल्कि परीक्षा के डर से जूझ रहे किशोरों को मनोवैज्ञानिक सहारा भी देगी।
रायपुर स्थित माशिमं मुख्यालय में आज सुबह इस सेवा का विधिवत आगाज़ हुआ। जैसे ही हेल्पलाइन के नंबर सक्रिय हुए, पहले ही घंटे में प्रदेश भर से दर्जनों फोन कॉल्स आने शुरू हो गए। इनमें सबसे ज्यादा सवाल गणित और विज्ञान जैसे विषयों को लेकर थे, लेकिन कुछ छात्र ऐसे भी थे जो केवल अपनी घबराहट साझा करना चाहते थे। मंडल के अधिकारियों का कहना है कि यह सेवा परीक्षा खत्म होने तक लगातार जारी रहेगी, जिससे छात्र खुद को अकेला महसूस न करें।
क्या है पूरा मामला?
हर साल फरवरी और मार्च का महीना स्कूली छात्रों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में लाखों छात्र शामिल होते हैं। अक्सर देखा गया है कि परीक्षा पूर्व तैयारी के दौरान छात्र छोटे-छोटे डाउट्स में उलझ जाते हैं या फिर परफॉरमेंस के प्रेशर में आकर डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए माशिमं ने अपनी वार्षिक हेल्पलाइन सेवा को इस साल और अधिक अपडेटेड वर्जन में पेश किया है।
इस हेल्पलाइन में दो स्तर पर मदद दी जा रही है। पहले स्तर पर शिक्षा मंडल के अधिकारी प्रशासनिक जानकारी जैसे एडमिट कार्ड, सेंटर की दूरी या नियमों के बारे में बता रहे हैं। वहीं, दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण स्तर पर विषय विशेषज्ञ और मनोचिकित्सक तैनात किए गए हैं। ये एक्सपर्ट्स सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक छात्रों के सवालों का जवाब देने के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसमें छुट्टी के दिनों को छोड़कर बाकी सभी दिन छात्र अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं।
घटना कैसे सामने आई?
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों और फीडबैक पर नजर डालें तो बोर्ड परीक्षा के दौरान छात्रों में ‘एग्जाम फोबिया’ के मामले तेजी से बढ़े हैं। पिछले साल भी कई ऐसे मामले सामने आए थे जहां छात्रों ने घबराहट में आकर गलत कदम उठाने की कोशिश की या फिर तनाव के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई। इन परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार और शिक्षा विभाग ने यह महसूस किया कि छात्रों को एक ऐसे मंच की जरूरत है जहां वे अपनी बात बिना किसी हिचकिचाहट के रख सकें।
आज सुबह जब रायपुर के पेंशन बाड़ा स्थित माशिमं कार्यालय में फोन की घंटी बजी, तो पहला कॉल बस्तर संभाग के एक छात्र का था। छात्र अपनी तैयारी को लेकर काफी डरा हुआ था। वहां मौजूद काउंसलर ने करीब 15 मिनट तक उससे बात की और उसे ‘टाइम मैनेजमेंट’ के टिप्स दिए। इसके बाद धीरे-धीरे कॉल्स का सिलसिला बढ़ता गया और दोपहर होते-होते दुर्ग, बिलासपुर और अंबिकापुर जैसे शहरों से भी बड़ी संख्या में छात्र जुड़ने लगे।
पुलिस / प्रशासन ने क्या कहा?
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि इस हेल्पलाइन का मुख्य उद्देश्य छात्रों के भीतर से परीक्षा का डर निकालना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हेल्पलाइन नंबर 1800-233-4363 (Toll-Free) पर कोई भी परीक्षार्थी, अभिभावक या शिक्षक संपर्क कर सकता है। प्रशासन ने इस बार मनोवैज्ञानिकों की संख्या में भी इजाफा किया है ताकि करियर काउंसलिंग और तनाव प्रबंधन पर बेहतर ध्यान दिया जा सके।
मंडल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमने इस सेवा को पूरी तरह से निशुल्क रखा है। कई बार छात्र अपने शिक्षकों या माता-पिता से अपनी कमजोरी साझा नहीं कर पाते, लेकिन एक अनजान काउंसलर से वे खुलकर बात करते हैं। हमने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में भी इस हेल्पलाइन नंबर का प्रचार-प्रसार करें ताकि अंतिम पंक्ति में खड़ा छात्र भी इसका लाभ उठा सके।”
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में अभिभावकों ने मंडल के इस कदम का स्वागत किया है। एक अभिभावक, रमेश सिन्हा ने बताया कि उनका बेटा गणित को लेकर काफी परेशान रहता था, लेकिन हेल्पलाइन पर विशेषज्ञ से बात करने के बाद उसे कुछ जरूरी टॉपिक्स को समझने में आसानी हुई है। अभिभावकों का मानना है कि घर पर वे बच्चों को सांत्वना तो दे सकते हैं, लेकिन विषयों की तकनीकी बारीकियां केवल एक शिक्षक ही समझा सकता है।
वहीं, कुछ शिक्षकों का कहना है कि हेल्पलाइन से उन छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो कोचिंग या एक्स्ट्रा ट्यूशन नहीं ले पाते। सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए यह सेवा एक वरदान की तरह है। छात्रों में भी इसे लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। रायपुर के एक स्कूली छात्र आयुष ने कहा, “मुझे डर था कि अगर मैं परीक्षा हॉल में कुछ भूल गया तो क्या होगा? काउंसलर मैम ने मुझे बताया कि ब्रीदिंग एक्सरसाइज और रिविज़न के सही तरीके से इस डर को जीता जा सकता है।”https://cgbse.nic.in
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले दिनों में जैसे-जैसे परीक्षाएं और करीब आएंगी, हेल्पलाइन पर कॉल करने वालों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। शिक्षा मंडल इसके लिए वेटिंग लिस्ट मैनेजमेंट और अतिरिक्त लाइन्स बिछाने पर भी विचार कर रहा है। इसके अलावा, मंडल की योजना है कि परीक्षा के दौरान भी सेंटर से जुड़ी शिकायतों के लिए एक त्वरित रिस्पांस टीम सक्रिय रखी जाए।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण छात्र सोशल मीडिया डिस्ट्रैक्शन को लेकर भी सवाल पूछ सकते हैं। इसके लिए मनोवैज्ञानिकों को विशेष ट्रेनिंग दी गई है। आने वाले सप्ताह में माशिमं कुछ मोटिवेशनल वीडियो और ‘डूज़ एंड डोंट्स’ (Do’s and Don’ts) की लिस्ट भी अपनी वेबसाइट पर जारी कर सकता है, जिससे छात्रों का मनोबल बना रहे।
तैयारी के लिए कुछ खास टिप्स (एक्सपर्ट्स के अनुसार)
हेल्पलाइन पर मौजूद विशेषज्ञों ने छात्रों के लिए कुछ बेसिक लेकिन जरूरी सलाह साझा की है:
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पुराने प्रश्न पत्र हल करें: पिछले 5 सालों के पेपर्स देखने से कॉन्फिडेंस बढ़ता है।
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नींद से समझौता न करें: कम से कम 6-7 घंटे की नींद अनिवार्य है, वरना परीक्षा के दिन दिमाग सुस्त रहेगा।
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लिखकर याद करें: केवल पढ़ने के बजाय लिखकर प्रैक्टिस करने से चीजें लंबे समय तक याद रहती हैं।
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ब्रेक लें: हर एक घंटे की पढ़ाई के बाद 10 मिनट का छोटा ब्रेक जरूर लें।
छत्तीसगढ़ बोर्ड की यह पहल निश्चित रूप से राज्य के शिक्षा स्तर में सुधार और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि आप या आपके आसपास कोई छात्र परीक्षा को लेकर चिंतित है, तो उसे तुरंत इस हेल्पलाइन की जानकारी दें।



