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हाथ की हड्डी टूटी पर हौसला अडिग: चोट के बावजूद दतिया पहुंचे तेली कर्मा सेना के संस्थापक अश्वंत साहू

छत्तीसगढ़/महासमुंद| 05 फरवरी 2026 समाज सेवा और संगठन के प्रति समर्पण की मिसाल अक्सर किताबों में मिलती है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे उदाहरण विरले ही देखने को मिलते हैं। अश्वंत तुषार साहू तेली कर्मा सेना के संस्थापक ने हाल ही में कुछ ऐसा ही कर दिखाया है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश के सामाजिक गलियारों में हो रही है। गंभीर शारीरिक चोट और असहनीय दर्द के बावजूद उन्होंने अपने व्यक्तिगत स्वास्थ्य से ऊपर समाज के हितों को रखा। दतिया में आयोजित प्रदेश स्तरीय तेली, साहू, राठौर चिंतन बैठक में उनकी उपस्थिति ने न केवल कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो शरीर की बाधाएं मायने नहीं रखतीं।

यह आयोजन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि समाज के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने का एक महत्वपूर्ण मंच था। अश्वंत साहू का वहां पहुंचना उन तमाम लोगों के लिए एक कड़ा संदेश था जो छोटी-छोटी बाधाओं के सामने हार मान लेते हैं। बैठक में मौजूद लोगों ने जब उन्हें पट्टी बंधे हाथ के साथ मंच पर देखा, तो पूरा परिसर उनके स्वागत में तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

क्या है पूरा मामला?

घटना की पृष्ठभूमि उस वक्त तैयार हुई जब पूरा समाज दतिया में होने वाली इस बड़ी चिंतन बैठक की तैयारियों में जुटा था। राष्ट्रीय तेली कर्मा सेना के संस्थापक अश्वंत तुषार साहू इस बैठक के मुख्य स्तंभों में से एक थे। श्री साहू ने कार्यक्रम के दौरान खुद इस वाकये का जिक्र किया कि कैसे नियति ने उनकी परीक्षा ली। तय कार्यक्रम के मुताबिक, 29 जनवरी को वे महासमुंद से रायपुर रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुए थे, जहाँ से उन्हें दतिया के लिए ट्रेन पकड़नी थी।

इसी सफर के दौरान वे एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क हादसे का शिकार हो गए। हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके हाथ की हड्डी टूट गई। आनन-फानन में उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया और डॉक्टरों ने उन्हें सख्त हिदायत दी थी कि वे यात्रा न करें और पूरी तरह बेड रेस्ट पर रहें। लेकिन, अश्वंत साहू के मन में समाज के उन हजारों लोगों की उम्मीदें तैर रही थीं, जो दतिया में उनका इंतजार कर रहे थे। उन्होंने डॉक्टरों की सलाह और शारीरिक पीड़ा को पीछे छोड़ते हुए दतिया जाने का कठिन फैसला लिया।

घटना कैसे सामने आई?

दतिया में जब कार्यक्रम की शुरुआत हुई, तो आयोजक इस बात को लेकर संशय में थे कि क्या श्री साहू ऐसी स्थिति में पहुंच पाएंगे। लेकिन जैसे ही वे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, वहां मौजूद हर व्यक्ति उनकी कर्तव्यनिष्ठा देखकर दंग रह गया। उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत ही उन शब्दों से की जिसने सबकी आंखों में चमक भर दी। उन्होंने कहा, “भले ही मेरे हाथ की हड्डी टूटी है, लेकिन मेरा हौसला कभी नहीं टूट सकता”।

बैठक के दौरान यह बात तेजी से फैली कि संस्थापक महोदय इतनी बड़ी चोट के बाद भी सफर तय करके आए हैं। स्थानीय मीडिया और समाज के प्रतिनिधियों ने इसे एक ‘साहसिक कदम’ करार दिया। श्री साहू ने बताया कि उनके लिए समाज का संगठन किसी भी व्यक्तिगत पीड़ा से कहीं बड़ा है। उन्होंने मंच से साझा किया कि जब वे दर्द से जूझ रहे थे, तब उन्हें समाज की एकता का विचार ही शक्ति दे रहा था।

प्रशासन और समाज के प्रबुद्ध जनों की राय

बैठक में केवल राजनीतिक या सामाजिक चर्चा ही नहीं हुई, बल्कि समाज के बौद्धिक वर्ग ने भी अपनी बात रखी। अश्वंत साहू के इस कदम पर स्थानीय प्रशासन के कुछ अधिकारियों (जो समाज से जुड़े थे) ने अनौपचारिक रूप से कहा कि नेतृत्व वही होता है जो मुश्किल घड़ी में सामने खड़ा दिखे। समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि अश्वंत जी ने आज जो उदाहरण पेश किया है, वह युवाओं के लिए मार्गदर्शक बनेगा।

प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी ऐसी बैठकों का महत्व बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ से समाज की मुख्यधारा की मांगें शासन तक पहुँचती हैं। साहू समाज के बुजुर्गों ने कहा कि पिछले कई दशकों में उन्होंने कई नेता देखे, लेकिन अपने स्वास्थ्य को दांव पर लगाकर समाज के बीच आने वाला जुनून बहुत कम देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि अश्वंत साहू की यह सक्रियता संगठन को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

महासमुंद और दतिया दोनों ही जगहों पर इस घटना की खूब चर्चा है। महासमुंद के स्थानीय निवासी, जो अश्वंत साहू को करीब से जानते हैं, उनका कहना है कि वे शुरू से ही जुझारू व्यक्तित्व के धनी रहे हैं। दतिया के युवाओं में इस बात को लेकर काफी उत्साह दिखा। कॉलेज जाने वाले छात्रों से लेकर छोटे व्यापारियों तक, जो इस तेली, साहू, राठौर बैठक का हिस्सा थे, उन्होंने इसे ‘प्रेरणा का महाकुंभ’ बताया।

सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसमें वे एक हाथ में माइक थामे और दूसरे हाथ में पट्टी बांधे समाज को संबोधित कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि आज के दौर में जब नेता केवल चुनाव के समय दिखते हैं, अश्वंत साहू जैसे लोग समाज को वैचारिक रूप से मजबूत करने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं।

आगे क्या हो सकता है और समाज का लक्ष्य

अश्वंत साहू ने इस चिंतन बैठक के माध्यम से भविष्य का एक स्पष्ट रोडमैप तैयार कर दिया है। उनका लक्ष्य केवल भीड़ जुटाना नहीं, बल्कि समाज के हर अंतिम व्यक्ति को सशक्त बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आगामी महीनों में तेली कर्मा सेना गांव-गांव जाकर सदस्यता अभियान चलाएगी और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेगी।

आगे की रणनीति पर चर्चा करते हुए उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर काम करने का संकल्प लिया:

  • शिक्षा और छात्रवृत्ति: समाज के मेधावी लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए विशेष कोष की स्थापना।

  • रोजगार सृजन: समाज के युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देना।

  • राजनीतिक प्रतिनिधित्व: जनसंख्या के अनुपात में समाज की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करना।

External Link Suggestion: Department of Public Relations, Chhattisgarh

बैठक का समापन एक संकल्प के साथ हुआ। अश्वंत साहू ने सभी से अपील की कि वे अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के साथ-साथ समाज के प्रति अपने ऋण को भी याद रखें। कार्यक्रम के अंत में एक सकारात्मक संदेश प्रसारित किया गया कि एकता ही वह सूत्र है जिससे समाज का समग्र विकास संभव है।

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