मूक पशुओं की सेवा के संकल्प के साथ नए सफर पर निकले भावी पशुसेवा कर्मी, महासमुंद वेटरनरी पॉलिटेक्निक में फाइनल वाइवा संपन्न
प्रधान संपादक मयंक गुप्ता/05 नवंबर 2026/ दिन गुरुवार महासमुंद, छत्तीसगढ़।
शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना नहीं, बल्कि अर्जित ज्ञान को समाज और जीव-जंतुओं के कल्याण में उपयोग करना भी है। इसी उद्देश्य को आत्मसात करते हुए दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग के अंतर्गत संचालित वेटरनरी पॉलिटेक्निक, महासमुंद में द्वितीय वर्ष द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों की अंतिम मौखिक परीक्षा (फाइनल वाइवा-वोसी) सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक पड़ाव के पूरा होने के साथ ही विद्यार्थियों के सामने पशुपालन एवं पशु चिकित्सा के क्षेत्र में अपने ज्ञान और कौशल को व्यवहार में उतारने की नई चुनौती भी सामने आई है।
संस्थान में आयोजित फाइनल वाइवा के दौरान छात्र-छात्राओं ने अपनी विषयगत समझ, अब तक अर्जित शैक्षणिक ज्ञान और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों की अध्ययन क्षमता के साथ-साथ विषयों को समझने और उनसे जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी का भी मूल्यांकन किया गया। सभी विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया और अपनी तैयारी के अनुरूप जवाब प्रस्तुत किए।
किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी जरूरी
परीक्षा संपन्न होने के पश्चात संस्थान की प्रभारी प्राचार्य डॉ. गोविना देवांगन के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों के लिए एक विशेष प्रेरणात्मक संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसमें विषय विशेषज्ञ डॉ. रामचंद्र रामटेके एवं डॉ. प्रमोद कोसरिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए पशु चिकित्सा एवं पशुपालन के क्षेत्र में व्यावहारिक दक्षता के महत्व को विस्तार से समझाया।
विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी विषय का सैद्धांतिक ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब उसे वास्तविक परिस्थितियों में सही तरीके से लागू किया जा सके। पशु चिकित्सा का क्षेत्र ऐसा है, जहां छोटी-सी लापरवाही भी पशुओं के स्वास्थ्य और जीवन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के साथ-साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण, तकनीकी समझ और अनुभव पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे अपने ज्ञान को लगातार विकसित करते रहें और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप नई तकनीकों एवं चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी हासिल करते रहें। वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि पशुओं की सेवा केवल रोजगार या व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों से जुड़ा कार्य है।
सेवा भावना, ईमानदारी और जिम्मेदारी ही बनेगी असली पहचान
प्रेरणात्मक सत्र के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि पशु चिकित्सा के क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए केवल डिग्री या प्रमाणपत्र पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए निरंतर अभ्यास, मेहनत, धैर्य और अपने कार्य के प्रति ईमानदारी आवश्यक है। मूक पशु अपनी तकलीफ शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते, ऐसे में उनकी पीड़ा को समझना और समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराना इस क्षेत्र से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से अपेक्षा जताई कि वे भविष्य में जहां भी अपनी सेवाएं दें, वहां व्यावसायिक दक्षता के साथ संवेदनशीलता और सेवा भावना को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को उचित मार्गदर्शन देना, पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को प्रोत्साहित करना भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
शिक्षकों के आशीर्वाद के साथ उज्ज्वल भविष्य की कामना
कार्यक्रम के समापन अवसर पर संस्थान के शिक्षकों एवं उपस्थित अधिकारियों ने सभी विद्यार्थियों को आगामी भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, अनुशासन बनाए रखने और शिक्षा के दौरान प्राप्त अनुभवों का सकारात्मक उपयोग करने की प्रेरणा दी।
शिक्षकों के मार्गदर्शन और शुभाशीष से विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। फाइनल वाइवा के सफल आयोजन और शैक्षणिक गतिविधियों के निर्विघ्न समापन पर संस्थान के स्टाफ ने भी प्रसन्नता व्यक्त की।
पशुसेवा के क्षेत्र में नई संभावनाओं की उम्मीद
गौरतलब है कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका का एक महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में प्रशिक्षित एवं कुशल पशुसेवा कर्मियों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। पशुओं का बेहतर स्वास्थ्य, समय पर उपचार, वैज्ञानिक देखभाल और पशुपालकों को सही सलाह देना इस क्षेत्र की प्रमुख आवश्यकताएं हैं।
महासमुंद वेटरनरी पॉलिटेक्निक में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए फाइनल वाइवा का संपन्न होना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक चरण है। अब इन विद्यार्थियों से अपेक्षा है कि वे संस्थान में अर्जित ज्ञान, प्रशिक्षण और अनुभव को अपने भविष्य के कार्यक्षेत्र में उपयोग करते हुए पशुपालन एवं पशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में योगदान देंगे।
संस्थान के शिक्षकों का विश्वास है कि मेहनत, ईमानदारी और सेवा भावना के साथ आगे बढ़ने वाले विद्यार्थी भविष्य में पशु चिकित्सा एवं पशुपालन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित करेंगे।
