महासमुंद के किसानों का ऐलान: धान का MSP 3358 रुपये प्रति क्विंटल करो, पुरानी बकाया राशि तुरंत दो वरना आंदोलन तय – मानिक साहू

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महासमुंद के किसानों का ऐलान: धान का MSP 3358 रुपये प्रति क्विंटल करो, पुरानी बकाया राशि तुरंत दो वरना आंदोलन तय – मानिक साहू

प्रधान संपादक मयंक गुप्ता / 10 अक्टूबर 2026 / दिन शनिवार
महासमुंद। खेती की लागत आसमान छू रही है, लेकिन फसल का सही दाम नहीं मिल रहा। इस दोहरी मार से परेशान महासमुंद के किसानों ने अब चुप रहने से इनकार कर दिया है। महासमुंद किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मानिक साहू के नेतृत्व में किसानों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक जोरदार ज्ञापन सौंपकर साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी जायज मांगें नहीं मानी गईं तो व्यापक आंदोलन तय है।

क्या हैं किसान की मुख्य मांगें..?

किसानों ने सबसे पहले धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाकर 3358 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि खाद, बीज, दवा, डीजल और मजदूरी की बढ़ती कीमतों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है। ऐसे में पुराना MSP किसानों को राहत नहीं दे पा रहा।

इसके अलावा ज्ञापन में ये महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं:

पुरानी बकाया अंतर राशि का तुरंत भुगतान: वित्तीय वर्ष 2024-25 की 117 रुपये प्रति क्विंटल और 2025-26 की 186 रुपये प्रति क्विंटल की अंतर राशि तुरंत किसानों के खाते में भेजी जाए।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना की लंबित चौथी किस्त का अविलंब भुगतान किया जाए।

2026-27 में केंद्र सरकार द्वारा MSP में की जाने वाली किसी भी वृद्धि का पूरा लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे।

पूरे देश और प्रदेश में समर्थन मूल्य गारंटी कानून लागू किया जाए, ताकि MSP कानूनी रूप से बाध्यकारी बने और किसानों का शोषण बंद हो।

15 नवंबर की बाध्यता पर भी सवाल

ज्ञापन में धान खरीदी की समय-सीमा को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है। महासमुंद जिले के बागबाहरा समेत कई मैदानी इलाकों में अक्टूबर के अंत तक धान की कटाई पूरी हो जाती है। ऐसे में 15 नवंबर तक इंतजार करना किसानों के लिए बहुत जोखिम भरा है।

किसानों का कहना है कि बेमौसम बारिश, नमी और भंडारण की कमी के कारण खेत या घर में पड़ी फसल खराब होने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसलिए खरीदी की शुरुआत स्थानीय फसल कटाई के समय के हिसाब से ही होनी चाहिए, न कि एक तय तारीख के इंतजार में।

चेतावनी साफ है

जिलाध्यक्ष मानिक साहू ने साफ कहा कि किसानों की ये मांगें न तो कोई राजनीतिक नारा हैं और न ही अव्यावहारिक। ये जमीनी हकीकत पर आधारित हैं। अगर शासन ने इन पर सहानुभूतिपूर्वक और जल्द फैसला नहीं लिया, तो किसान वर्ग को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

महासमुंद के किसान अब इंतजार नहीं करना चाहते। वे चाहते हैं कि लागत के हिसाब से सही दाम मिले, पुरानी बकाया राशि समय पर पहुंचे और MSP को कानूनी सुरक्षा मिले। अब गेंद सरकार के पाले में है।

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