शिक्षा में आध्यात्मिकता का समावेश ही करेगा विश्व नवनिर्माण: ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा भव्य शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित

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शिक्षा में आध्यात्मिकता का समावेश ही करेगा विश्व नवनिर्माण: ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा भव्य शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/ दिन सोमवार/ 07 सितंबर 2026
​महासमुंद / प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शिक्षाविद प्रभाग द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य ‘शिक्षक सम्मान कार्यक्रम’ का आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस विशेष समारोह में महासमुंद जिले के विभिन्न स्कूल एवं कॉलेजों से आए उत्कृष्ट शिक्षकों को उनकी अतुलनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
​कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं प्रभु स्मृति के साथ भक्तिमय माहौल में हुई। इसके पश्चात सभी नवागत अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर भावभिना स्वागत किया गया। मंच का कुशल एवं प्रभावपूर्ण संचालन बीके दोमेश्वरी दीदी द्वारा किया गया।

​मूल्य आधारित शिक्षा से ही होगा स्वर्णिम समाज का निर्माण

​रायपुर से पधारीं मुख्य वक्ता बीके चंद्रकला दीदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व नवनिर्माण की नींव मूल्य आधारित शिक्षा पर टिकी है। जब तक शिक्षा के साथ आध्यात्मिकता का समावेश नहीं होगा, तब तक नई पीढ़ी में उच्च नैतिक संस्कारों का बीजारोपण संभव नहीं है।

​उन्होंने ‘शिक्षक’ शब्द की अनूठी व्याख्या करते हुए कहा:

​शि (शिखर): जो विद्यार्थियों को सफलता के शिखर तक पहुँचाए।

​क्ष (क्षमा): जो क्षमाशीलता का गुण सिखाए।

​क (कमजोरी मिटाने वाला): जो बच्चों की आंतरिक कमजोरियों को दूर करे।

​उन्होंने शिक्षकों को ‘लव एंड लॉ’ (प्रेम और अनुशासन) का संतुलन बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि विद्यार्थियों में मूल्यों का विकास करने से पहले शिक्षकों को स्वयं उन आदर्शों, मूल्यों और शांति (साइलेंस) को अपने जीवन में धारण करना होगा।

​किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर बच्चों का मार्गदर्शन करें:
सुजाता विश्वनाथन

​समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद वृंदावन स्कूल की डायरेक्टर सुजाता विश्वनाथन ने कहा कि एक सच्चे शिक्षक को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जब शिक्षक व्यावहारिक और नैतिक शिक्षा देंगे, तभी शिक्षक दिवस मनाने की सार्थकता सिद्ध होगी।
​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय विधायक माननीय योगेश्वर राजू सिंहा की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने शिक्षकों के राष्ट्र निर्माण में योगदान की मुक्तकंठ से सराहना की।

​परमपिता परमात्मा ही सर्वश्रेष्ठ शिक्षक: बीके प्रीति दीदी

​सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि इस सृष्टि का सबसे महान और सच्चा शिक्षक वह परमपिता परमात्मा ही है। राजयोग मेडिटेशन के नियमित अभ्यास से हम ईश्वर से जुड़कर अपने भीतर दिव्य संस्कारों का समावेश कर सकते हैं। इससे समाज में एक श्रेष्ठ शिक्षक और अनुशासित विद्यार्थी का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया जा सकता है।
​कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित सभी सम्मानित शिक्षकों एवं अतिथियों को ईश्वरीय सौगात और प्रसाद भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया गया।

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