आध्यात्मिक चेतना का महापर्व: ब्रह्माकुमारीज़ उपकार भवन में दिव्य अनुभूतियों के साथ संपन्न हुआ रक्षाबंधन महोत्सव

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आध्यात्मिक चेतना का महापर्व: ब्रह्माकुमारीज़ उपकार भवन में दिव्य अनुभूतियों के साथ संपन्न हुआ रक्षाबंधन महोत्सव

रिपोर्टर मयंक गुप्ता/28 अगस्त / दिन शुक्रवार
महासमुंद / तुमगांव रोड स्थित उपकार भवन में आज रक्षा बन्धन के पावन पर्व पर
​प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवाकेंद्र ‘उपकार भवन’ में पवित्रता, स्नेह, शांति और निस्वार्थ प्रेम का पावन पर्व रक्षाबंधन अपार श्रद्धा, उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समस्त ईश्वरीय परिवार के सदस्यों ने एकसाथ एकत्रित होकर इस पर्व के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को समझा और आत्मसात किया।
​कार्यक्रम का शुभारंभ आत्म-स्मृति के दिव्य वातावरण में हुआ। सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रीति दीदी जी ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं और भाई-बहनों को मस्तक पर आत्म-स्मृति का तिलक लगाया, कलाई पर पवित्रता का रक्षासूत्र (राखी) बांधा और मुख मीठा कराकर परमात्म स्नेह की अनुभूति कराई। इस दौरान सभी साधकों से जीवन में कम से कम एक बुराई या नकारात्मक संस्कार को सदैव के लिए त्यागने का दृढ़ ‘संकल्प पत्र’ भी भरवाया गया।

​राखी केवल शारीरिक रिश्ता नहीं, परमात्मा से पवित्रता का वायदा: बीके प्रीति दीदी

​समारोह को संबोधित करते हुए बीके प्रीति दीदी ने रक्षाबंधन के वास्तविक आध्यात्मिक अर्थ पर प्रकाश डाला:

​आत्मा का परमात्मा से मिलन: रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के शारीरिक या लौकिक संबंधों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह सर्वशक्तिमान परमपिता परमात्मा और आत्मा के पवित्र मिलन तथा संपूर्ण पवित्रता की प्रतिज्ञा का अलौकिक पर्व है।

​मस्तक पर तिलक का महत्व: मस्तक के मध्य लगाया जाने वाला तिलक हमें याद दिलाता है कि हम यह नश्वर भौतिक शरीर नहीं हैं, बल्कि भृकुटी के बीच चमकती हुई एक अजर-अमर ‘ज्योति बिंदु आत्मा’ हैं।

​रक्षासूत्र का संदेश: कलाई पर बांधी जाने वाली राखी काम, क्रोध, मोह, लोभ जैसे विकारों और नकारात्मक विचारों से स्वयं को सुरक्षित रखने की आध्यात्मिक ढाल है।

​विश्व बंधुत्व की भावना: हम सभी आत्माएं एक ही परमपिता की संतान हैं, इस नाते हम आपस में भाई-बहन हैं। जब हम परमात्मा से जुड़ते हैं, तो उनकी शक्तियां हमारी हर नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करती हैं।

​दीदी ने आगे कहा कि जब हम वर्तमान समय में ईश्वर द्वारा दिए जा रहे इस अलौकिक ज्ञान को अपने व्यावहारिक जीवन में धारण करते हैं, तभी सही अर्थों में रक्षाबंधन मनाना सार्थक होता है।

​कार्यक्रम के समापन पर बीके प्रीति दीदी ने सभी उपस्थित भाई-बहनों को परमात्म ब्लेसिंग कार्ड (ईश्वरीय वरदान) प्रदान किए, जिससे सभी का आत्मबल और मनोबल दोगुना हो गया। संपूर्ण प्रांगण ईश्वरीय स्मृतियों और शांति के स्पंदनों से सराबोर रहा।

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