महासमुंद में पंचायती राज का ‘मज़ाक’: 6 बिंदुओं पर वित्तीय हेराफेरी के बड़े आरोप, 2 बार बनी टीम, पर ‘बिदाई’ का बहाना बनाकर खट्टी पहुंचे ही नहीं जांच अफसर..!
विशेष समाचार रिपोर्ट (महासमुंद/छत्तीसगढ़)
रिपोर्टर: मयंक गुप्ता / 25 अगस्त 2026 / मंगलवार
महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की ग्राम पंचायत खट्टी में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने जिला प्रशासन की कार्यशैली और पंचायती राज व्यवस्था की पारदर्शिता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ग्राम पंचायत में कथित तौर पर हुए व्यापक भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, वित्तीय अनियमितताओं और सरपंच पति के खुलेआम प्रशासनिक हस्तक्षेप की गंभीर शिकायतों के बाद दो-दो बार जांच टीमें गठित की गईं। हालांकि, जांच अधिकारी अशोक चन्द्राकर (प्रभारी जिला अंकेक्षक, जिला पंचायत महासमुंद) की लगातार टालमटोल की वजह से पूरी प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।
क्या है पूरा विवाद और कैसे शुरू हुई कार्रवाई..?
मामला ग्राम पंचायत खट्टी में हुए 06 प्रमुख बिंदुओं पर आधारित वित्तीय घोटालों और गैर-कानूनी गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद जिला पंचायत महासमुंद ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश क्रमांक/पंचा/शिका./2026/1598/महासमंद (दिनांक 03.08.2026) जारी कर जांच के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
इसके बाद औपचारिक “जांच हेतु सूचना पत्र” जारी कर संबंधित पक्षों को तलब किया गया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
श्रीमती अनिता मोती मेहरा (सरपंच, ग्राम पंचायत खट्टी)
श्री लेखराम चन्द्राकर (तत्कालीन पंचायत सचिव)
श्री जीवनराखन बंजारे (वर्तमान पंचायत सचिव)
दो बार तय हुई तिथि, दोनों बार अधिकारी का ‘वॉकओवर’
प्रशासनिक आदेश के मुताबिक, जांच की पहली तारीख 18 अगस्त 2026 को प्रातः 11:30 बजे कार्यालय ग्राम पंचायत भवन खट्टी में तय की गई थी। लेकिन अज्ञात कारणों से उस दिन जांच अधिकारी पहुंचे ही नहीं।
इसके बाद दूसरा सूचना पत्र 18 अगस्त को ही जारी कर नई तारीख 25 अगस्त 2026 को प्रातः 11:30 बजे नियत की गई। नियमानुसार शिकायतकर्ता ग्रामीणों और पंचों—जिनमें मन्नूराम, शीतल, नोहर साहू, मनहरण साहू, दुजराम पटेल समेत कुल 41 से अधिक ग्रामीण शामिल थे—को सभी आवश्यक साक्ष्यों और दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहने को कहा गया।
ग्रामीण काम-धंधा छोड़कर करते रहे इंतजार, अफसर मनाते रहे ‘बिदाई’
हद तो तब हो गई जब निर्धारित तिथि पर दर्जनों ग्रामीण और पंच अपना रोज़मर्रा का कामकाज छोड़कर पंचायत भवन में घंटों अधिकारी का इंतजार करते रहे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच अधिकारी अशोक चन्द्राकर ने पहुंचने के बजाय बहानेबाजी शुरू कर दी।
ग्रामीणों के अनुसार, एक टेलीफोनिक बातचीत में जांच अधिकारी ने यह कहकर आने से साफ इनकार कर दिया कि वे किसी “बिदाई कार्यक्रम” में व्यस्त हैं। इस रवैये से आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि क्या प्रशासनिक जांच से ज्यादा जरूरी किसी का विदाई समारोह है..?
उच्च अधिकारियों तक पहुंची गूंज, बड़े आंदोलन की चेतावनी
इस पूरे प्रकरण की लिखित सूचना और शिकायत की प्रतियां उच्च स्तर पर भी भेजी जा चुकी हैं, जिनमें शामिल हैं:
1 जिला कलेक्टर, महासमुंद
2 मुख्य कार्यपालन अधिकारी
(CEO), जिला पंचायत महासमुंद
3 उपसंचालक, पंचायत विभाग
4 जनपद पंचायत महासमुंद
ग्रामीणों का कहना है कि जब उच्च अधिकारियों के आदेश के बाद भी निचले स्तर के जांच अधिकारी इस तरह लापरवाही दिखाएंगे, तो आम जनता का न्याय और प्रशासन से भरोसा उठना तय है। जांच में देरी से यह संदेह भी गहरा रहा है कि कहीं भ्रष्टाचारियों को बचाने या साक्ष्यों को छिपाने का मौका तो नहीं दिया जा रहा..?
प्रशासन के लिए कड़ा संदेश
जिला प्रशासन को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच अधिकारी अशोक चन्द्राकर से लिखित जवाब तलब करना चाहिए। साथ ही, किसी अन्य निष्पक्ष अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपकर एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पारदर्शी जांच पूरी कराई जानी चाहिए। यदि प्रशासन ने जल्द कड़े कदम नहीं उठाए, तो खट्टी ग्राम पंचायत के आक्रोशित नागरिक एक बड़े जन-आंदोलन की राह पकड़ने को मजबूर होंगे।
