सालिकराम डड़सेना की भावुक विदाई 43 वर्षों की समर्पित सेवा के बाद वन विभाग से सेवानिवृत्ति, पिथौरा में गरिमामय सम्मान समारोह

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
पिथौरा (महासमुंद जिला, छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ वन विभाग के एक वरिष्ठ और समर्पित अधिकारी सालिकराम डड़सेना ने 43 वर्षों की लंबी, निष्ठावान और प्रेरणादायी सेवा के बाद 31 जनवरी 2026 को सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्ति प्राप्त की। इस ऐतिहासिक क्षण को चिह्नित करने के लिए पिथौरा वन परिक्षेत्र कार्यालय परिसर में एक भावपूर्ण और गरिमापूर्ण विदाई समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी, न्यायिक पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा पिथौरा नगर के प्रमुख गणमान्य नागरिकों की भारी संख्या में उपस्थिति रही, जो डड़सेना के योगदान की व्यापक स्वीकृति का प्रमाण थी।
समारोह के प्रमुख अतिथिगण और अध्यक्षता
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्वयं सेवानिवृत्त अधिकारी सालिकराम डड़सेना उपस्थित रहे, जबकि उनकी धर्मपत्नी संतोषी डड़सेना विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। समारोह की अध्यक्षता संयुक्त वनमंडलाधिकारी सरायपाली यू.आर. बसंत ने की, जिन्होंने डड़सेना के सेवाकाल की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए सभी को प्रेरित किया। अति विशिष्ट अतिथियों में पिथौरा के न्यायिक मजिस्ट्रेट शौरभ बारा और बसना के न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजीत जांगड़े भी शरीक हुए, जिनकी उपस्थिति ने समारोह को और अधिक प्रतिष्ठित बना दिया।
इसके अतिरिक्त, सेवानिवृत्त सहायक वनसंरक्षक आर.पी. साहू, संयुक्त वनमंडलाधिकारी पिथौरा डिम्पी बैस, सेवानिवृत्त रेंजर बी.आर. खुंटे, विजय शंकर साहू, अभिराम साहू, तोषराम सिन्हा, पिथौरा रेंज के नव नियुक्त प्रभारी रेंजर सुखराम निराला तथा पिथौरा नगर की पार्षद रामकुंवर सिन्हा की विशेष उपस्थिति ने समारोह को और समृद्ध किया।
वक्ताओं की सराहना और प्रेरणादायी वक्तव्य
समारोह के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने सालिकराम डड़सेना के लंबे सेवा काल में किए गए असाधारण योगदानों, उनके सशक्त नेतृत्व, कठोर अनुशासन, सौम्य स्वभाव और टीम वर्क की भावना की खुलकर प्रशंसा की। मंचासीन अतिथियों के अलावा, श्रृंखला साहित्य मंच के प्रख्यात कवि प्रवीण प्रवाह, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के ब्लॉक अध्यक्ष उमेश दीक्षित, सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर रमेश सिंह ठाकुर सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए डड़सेना के कार्यों को भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया। उन्होंने उनके द्वारा वन संरक्षण, कर्मचारी कल्याण और सामुदायिक विकास में निभाई गई भूमिका पर विशेष जोर दिया।
विशेष आकर्षण का केंद्र रहा जब सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर रतन सिंह डड़सेना ने सालिकराम डड़सेना के जन्म से लेकर सेवानिवृत्ति तक के समृद्ध जीवन, उनके सौम्य व्यक्तित्व और अनुकरणीय कार्यशैली पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने उनके पूरे 43 वर्षों के सेवा सफर का एक जीवंत और प्रेरक सारांश प्रस्तुत किया, जो उपस्थितजनों को गहन चिंतन के लिए प्रेरित करने वाला था।
मुख्य अतिथि का भावुक संबोधन सेवा यात्रा का रोचक खुलासा
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए सालिकराम डड़सेना भावुक हो उठे और उन्होंने अपने सेवा जीवन की एक प्रेरक यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि उनका सफर 1983 में पिथौरा काष्ठागार में दैनिक वेतनभोगी (दिन मजदूर) के रूप में शुरू हुआ था। धीरे-धीरे मेहनत और लगन से 1990 में वनरक्षक, 2012 में वनपाल और अंततः 2018 में उपवनक्षेत्रपाल (वन परिक्षेत्र अधिकारी) के पद पर पदोन्नति प्राप्त की।
अपने पूरे करियर में उन्होंने छत्तीसगढ़ के विविध भौगोलिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इनमें बस्तर संभाग के चारामा, कांकेर, भानुप्रतापपुर तथा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व शामिल हैं। इसी प्रकार, बलौदाबाजार जिले के बारनवापारा, चरौदा, देवपुर क्षेत्र तथा महासमुंद और कसडोल में रेंजर के पद पर उन्होंने वन संरक्षण और जैव विविधता की रक्षा में उल्लेखनीय कार्य किया।
संगठनात्मक और सामाजिक योगदान एक बहुआयामी व्यक्तित्व
सेवाकाल के साथ-साथ सालिकराम डड़सेना सामाजिक और संगठनात्मक क्षेत्रों में भी अग्रणी रहे। उन्होंने प्रारंभ से ही भारतीय मजदूर संघ से जुड़कर अविभाजित रायपुर जिले में अरुण कुमार चौबे के मार्गदर्शन में संगठनात्मक दायित्व निभाए। नागदा, बैंगलोर, दिल्ली और भोपाल में आयोजित संघ के प्रमुख अधिवेशनों में सक्रिय भागीदारी की तथा संगठन के माध्यम से सैकड़ों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित पदों पर स्थापित करने में निर्णायक भूमिका अदा की।
वे छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ महासमुंद के लगातार दस वर्षों तक जिला अध्यक्ष रहे और रायपुर संभाग तथा प्रांतीय स्तर पर भी मजबूत नेतृत्व प्रदान किया। सामाजिक मोर्चे पर, सिन्हा कलार समाज पिथौरा के मंडलेश्वर जिला अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहने के साथ ही वर्तमान में प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य के पद पर भी सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
सम्मान का भावुक क्षण और शुभकामनाएं
सेवानिवृत्ति पर प्राप्त सम्मान को सालिकराम डड़सेना ने अपने समस्त सेवा कार्यकाल का सर्वोच्च प्रतिफल बताते हुए इसे जीवन की ‘अमूल्य निधि’ करार दिया। इस भावुक पल में वे आंसुओं से भीग गए, जिसने उपस्थित सभी को गहराई से प्रभावित किया। सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और अतिथियों ने उनके सुखी, स्वस्थ, दीर्घायु और समृद्ध जीवन की हार्दिक कामना की तथा नई जीवन यात्रा के लिए हर्ष की शुभकामनाएं प्रदान कीं।
कार्यक्रम का संचालन और अन्य सम्मान
कार्यक्रम का संचालन शिक्षा जगत के संकुल प्रभारी राजाराम पटेल ने अत्यंत कुशलता से किया, जो पूरे समारोह को एक सुव्यवस्थित रूप प्रदान करने में सहायक रहा। आभार प्रदर्शन डिप्टी रेंजर ननकुसिया साहू ने भावपूर्ण ढंग से किया। इस अवसर पर वनरक्षक प्रशिक्षण शाला के वनपाल मो. शफी को भी शाल, श्रीफल और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया, जो समारोह की समावेशी भावना को दर्शाता है।
समारोह में महासमुंद के रेंजर सियाराम कर्मकार, डिप्टी रेंजर सतीश पटेल, ललित पटेल, राजकुमार साहू, वीरेंद्र पाठक, छबिराम साहू, सुशीला साहू सहित वन विभाग और अन्य विभागों के अनेक अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने सेवानिवृत्त अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से बधाई दी और उनके भविष्य के लिए शुभेच्छा व्यक्त की।
सालिकराम डड़सेना का यह सेवा सफर न केवल वन संरक्षण और पर्यावरण रक्षा के क्षेत्र में अपितु कर्मचारी हितों की रक्षा तथा सामाजिक उत्थान में भी एक जीवंत मिसाल के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी विदाई छत्तीसगढ़ वन विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन तो है, लेकिन उनके आदर्श लाखों युवाओं को प्रेरित करते रहेंगे।



