बाघामुडा धान घोटाला 3304 कट्टा ‘गायब’ कर शासन को ठगा 41 लाख का चूना..! समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव पर FIR दर्ज

प्रशासन की ट्रेन अब रफ़्तार पकड़ ली है पहले जगदीशपुर स्टेशन अब बाघामुड़ा स्टेशन अब ट्रेन की रुख किस ओर जाएगी और किसकी शामत आएगी क्यों कि,महासमुंद में धान घोटाले बाजों की जांच की आग भड़की
रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / 25 जनवरी 2026 महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत ग्रामीण सेवा सहकारी समिति मर्यादित बाघामुडा अब धान घोटाले का सबसे ताजा और चर्चित केंद्र बन चुका है। यहां के उपार्जन केंद्र से 3,304 कट्टा धान (करीब 1,321.6 क्विंटल) रातों-रात गायब हो गया, जिससे शासन को 40,96,960 रुपये (लगभग 41 लाख) का सीधा नुकसान हुआ। इस बड़े वित्तीय घपले के मुख्य आरोपी समिति प्रभारी प्रेमसिंह ध्रुव पर कोमाखान थाने में FIR दर्ज कर ली गई है।
कलेक्टर विनय लंगेह के सख्त निर्देश पर हुई आकस्मिक जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए:
ऑनलाइन रिकॉर्ड में उपलब्ध दिखाया गया: 1,25,878 कट्टा धान (50,351.20 क्विंटल)
भौतिक सत्यापन में फड़ पर मिला: सिर्फ 1,22,574 कट्टा
कमी: ठीक 3,304 कट्टा — समर्थन मूल्य 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 40.96 लाख रुपये की हेराफेरी!
डिप्टी कलेक्टर की टीम ने प्रेमसिंह ध्रुव और उनके सहकर्मियों की मौजूदगी में ही प्रत्येक स्टैक की गिनती की। कुल 74 स्टैक मिले, लेकिन कुल मात्रा में भारी कमी साफ नजर आई। जांच रिपोर्ट और पंचनामा में स्पष्ट लिखा है कि यह कमी जानबूझकर की गई है, ताकि शासन को आर्थिक हानि पहुंचाई जा सके। प्रेमसिंह ध्रुव पर धोखाधड़ी, वित्तीय अनियमितता और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं।
बाघामुडा क्यों बना फोकस..?
यह मामला महासमुन्द जिले में धान खरीदी सीजन 2025-26 के दौरान सामने आया सबसे ताजा और स्पष्ट घोटाला है।
बाकी घोटालों में ज्यादातर संग्रहण केंद्रों में ‘शॉर्टेज’ की आड़ में दीमक-चूहों का बहाना बनाया जाता है, लेकिन बाघामुडा में ऑनलाइन vs भौतिक रिकॉर्ड का सीधा अंतर साबित हुआ।
प्रभारी की मौजूदगी में ही गिनती हुई, फिर भी कमी — इससे साफ है कि यह संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित लूट थी।
FIR के बाद पुलिस अब प्रेमसिंह ध्रुव के बैंक खातों, फोन रिकॉर्ड, संपर्कों और पिछले लेन-देन की गहन जांच कर रही है। गिरफ्तारी की संभावना मजबूत है।
महासमुंद जिले में धान लूट का बड़ा सिलसिला
बाघामुडा का यह मामला अकेला नहीं है। जिले में ही अन्य केंद्रों से भी करोड़ों का धान गायब होने की खबरें हैं:
बागबाहरा संग्रहण केंद्र: 3.65% शॉर्टेज से 5.71 करोड़ का गबन (चूहे-दीमक का बहाना!)
जिले के 5 संग्रहण केंद्रों से कुल 81,620 क्विंटल धान लापता — नुकसान 25 करोड़ से ज्यादा!
अन्य केंद्रों में सूखत धान, अवैध परिवहन, फर्जी पर्ची और ओवरलोडिंग के मामले।
किसान संगठन और स्थानीय लोग आक्रोशित हैं। वे कह रहे हैं — “किसानों का धान हम देते हैं, लेकिन प्रभारी और कर्मचारी मिलकर लूट रहे हैं। पूरी रकम वसूली जाए और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए!”
कलेक्टर विनय लंगेह ने साफ कहा है: “अनियमितता में शामिल किसी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच सतत जारी रहेगी, रैंडम ऑडिट बढ़ाए जाएंगे और डिजिटल सत्यापन को और मजबूत किया जाएगा।”
बाघामुडा घोटाला अब पूरे महासमुंद जिले में ‘धान के जादूगरों’ के खिलाफ कार्रवाई की मिसाल बन चुका है।
सवाल ये है — क्या यह सिर्फ शुरुआत है? राज्यभर के अन्य जिलों में भी ऐसे ही ‘गायब धान’ के मामले सामने आने की आशंका बढ़ गई है।



