ब्रेकिंग: पुलिस ने 3 आरोपियों को किया गिरफ्तार…

Latest NewsTop Hindi Newsबेबाक बयानराज्य समाचारसोशल मीडिया

धान गबन का बड़ा खेल जगदीशपुर केंद्र में 8 लाख का चूना, प्रभारी कुशाग्र प्रधान पर FIR – महासमुंद में बढ़ते घोटालों की नई कड़ी..!

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद, 24 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में धान उपार्जन और संग्रहण केंद्रों पर घोटालों की बाढ़ आ गई है। जहां एक तरफ जिले के कई केंद्रों से करोड़ों रुपये के धान सूखने, चूहों-कीड़ों के नाम पर गायब होने की खबरें आ रही हैं, वहीं अब बसना ब्लॉक के जगदीशपुर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां के समिति प्रभारी कुशाग्र प्रधान पर 260 क्विंटल (650 पैकेट) धान गबन करने का गंभीर आरोप लगा है। इस कमी से शासन को कुल 8 लाख 6 हजार रुपये का सीधा नुकसान हुआ है – जिसमें समर्थन मूल्य के तहत 6 लाख 15 हजार 940 रुपये और कृषक उन्नति योजना की अतिरिक्त सहायता राशि 1 लाख 90 हजार 60 रुपये शामिल हैं।

भौतिक सत्यापन ने खोला राज

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत चल रही धान खरीदी प्रक्रिया के दौरान 21 जनवरी 2026 को पिथौरा के एसडीएम बजरंग वर्मा ने जगदीशपुर केंद्र का अचानक भौतिक सत्यापन किया। ऑनलाइन रिकॉर्ड और रिपोर्ट के अनुसार:
कुल खरीद: 58,556.40 क्विंटल धान
अब तक उठाव: 44,430 क्विंटल
स्टॉक में दिखाया गया: 14,126.40 क्विंटल
प्रभारी कुशाग्र प्रधान ने स्टॉक रजिस्टर में 22 स्टेक पर कुल 35,316 पैकेट धान होने का दावा किया। लेकिन सत्यापन टीम ने मौके पर गिनती की तो सिर्फ 34,666 पैकेट ही मिले। यानी 650 पैकेट (260 क्विंटल) धान कागजों पर तो थे, लेकिन हकीकत में गायब! यह कमी स्पष्ट रूप से जानबूझकर की गई लगती है, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा बिना किसी साजिश के अचानक गायब नहीं हो सकती।

कानूनी कार्रवाई और जांच शुरू

इस गबन को धान खरीद नीति 2025-26 का खुला उल्लंघन मानते हुए 23 जनवरी को बसना थाने में कुशाग्र प्रधान के खिलाफ धारा 316(5) BNSS (भारतीय न्याय संहिता) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान की कमी अकेले एक व्यक्ति के बस की बात नहीं – इसमें मिलीभगत या अन्य लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। यदि जांच गहराई में गई तो यह मामला और बड़े नेटवर्क तक पहुंच सकता है।

महासमुंद में धान घोटालों का सिलसिला

यह घटना महासमुंद जिले में अकेली नहीं है। हाल के दिनों में:
बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र में 5.71 करोड़ रुपये की शॉर्टेज (3.65% कमी) का मामला सामने आया, जहां चूहे, कीड़े और सूखने का बहाना बनाया गया।
जिले के कई केंद्रों से कुल 25 करोड़ रुपये तक के धान गायब होने की खबरें आईं।
कुछ जगहों पर धान सूख जाने का दावा किया जा रहा है, जबकि सुरक्षा और रखरखाव पर लाखों-करोड़ों खर्च होने के बावजूद कमी दिखाई गई।
कांग्रेस और किसान संगठन पहले से ही इस मुद्दे पर आक्रामक हैं और शासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत से उगाया धान जब सरकारी योजनाओं के नाम पर गायब हो रहा है, तो यह न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि किसानों के विश्वास पर भी डाका है।

प्रशासन का रुख

जिला प्रशासन ने साफ कहा है कि ऐसे सभी केंद्रों पर अब नियमित और सख्त सत्यापन बढ़ाया जाएगा। दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने पर आरोपित को जल्द गिरफ्तार किया जा सकता है।
यह मामला सवाल उठाता है – क्या धान उपार्जन व्यवस्था में सिस्टमेटिक गड़बड़ी है? या सिर्फ कुछ लोगों की लालच? जांच के नतीजे आने बाकी हैं, लेकिन महासमुंद के किसानों के लिए यह धान महापर्व अब घोटालों का सिलसिला बनता जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button