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वन विभाग की ताबड़तोड़ छापेमारी महासमुंद में अवैध सागौन लकड़ी का बड़ा जखीरा बरामद, आरोपी ने कबूला जुर्म

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद (छत्तीसगढ़) 13 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ के महासमुंद वन मंडल में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है, जहां वन अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर ग्राम जम्हर में एक घर पर छापा मारकर अवैध रूप से काटी गई सागौन की कीमती लकड़ी जब्त की है। इस कार्रवाई में सागौन के लट्ठे और चिरान सहित लगभग 1 लाख 32 हजार रुपये मूल्य की ईमारती लकड़ी बरामद हुई, जो जंगल से चोरी-छिपे काटकर घर की बाड़ी में छिपाई गई थी। आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने अपनी बेटी की शादी के लिए फर्नीचर बनवाने के उद्देश्य से मजदूरों से जंगल से लकड़ी मंगवाई थी। वन विभाग की इस सख्त कार्रवाई से अवैध कटाई पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मिसाल बन सकती है।
घटना की शुरुआत एक मुखबिर की विश्वसनीय सूचना से हुई, जिसके आधार पर वन परिक्षेत्र पिथौरा की टीम ने 13 जनवरी 2026 को तड़के सुबह ग्राम जम्हर में सीताराम चौधरी के घर पर दबिश दी। सीताराम, जो गणेशराम चौधरी का पुत्र है, के घर और बाड़ी की गहन तलाशी ली गई। जांच के दौरान अधिकारियों को घर के अंदर और बाड़ी के पैरा (घास-फूस) में छिपाए गए सागौन के गोले मिले, जो लगभग एक सप्ताह पहले पास के जंगल से काटकर लाए गए थे। अधिकारियों का अनुमान है कि यह लकड़ी सांगा (एक प्रकार का जंगल क्षेत्र) से अवैध रूप से प्राप्त की गई थी। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसका इरादा सिर्फ व्यक्तिगत उपयोग के लिए फर्नीचर तैयार करवाना था, लेकिन यह कार्य भारतीय वन अधिनियम के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।
यह पूरी कार्रवाई वन मंडलाधिकारी मयंक पांडेय के सीधे निर्देशन में संपन्न हुई, जबकि संयुक्त वन मंडलाधिकारी डिम्पी बैस ने मार्गदर्शन प्रदान किया। ऑपरेशन का नेतृत्व वन परिक्षेत्र अधिकारी शालिकराम डड़सेना ने किया, जिनकी टीम में सहायक परिक्षेत्र अधिकारी पश्चिम पिथौरा ननकुशिया साहू, ललित पटेल, परिसर रक्षी जम्हर मोहम्मद रज्जाक, परिसर रक्षी राजाडेरा प्रीतराम साहू, शुभम तिवारी, कोकिल कांत दिनकर, विरेंद्र बंजारे, कुलेश्वर डड़सेना, प्रभा ठाकुर, दीपिका रात्रे, पुष्पा नेताम जैसे अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। इसके अलावा, सुरक्षा श्रमिकों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों की मौजूदगी में यह छापेमारी की गई, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हुई। जब्त की गई वन संपदा को तुरंत काष्ठागार पिथौरा ले जाया गया, जहां आगे की जांच और मूल्यांकन किया जाएगा।
कानूनी रूप से, इस मामले में वन अपराध प्रकरण संख्या 13417/25 दर्ज किया गया है, जो भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 33 के अलावा लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 और अन्य संबंधित धाराओं के तहत है। वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि ऐसी अवैध कटाई न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी बिगाड़ती है। सागौन जैसी मूल्यवान लकड़ी की चोरी जंगलों की जैव विविधता पर गहरा असर डालती है, और इससे जुड़े अपराधों पर सख्ती बरतना जरूरी है। आरोपी सीताराम चौधरी से पूछताछ अभी भी जारी है, और जांच में और भी खुलासे होने की संभावना है। यदि कोई अन्य व्यक्ति इसमें शामिल पाया जाता है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग ने अपील की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जंगलों की रक्षा के लिए स्थानीय समुदाय सक्रिय भूमिका निभाएं और ऐसी अवैध गतिविधियों की सूचना तुरंत दें। इस घटना से साफ है कि वन संरक्षण के लिए सतर्कता और त्वरित कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है। आगे की जांच रिपोर्ट आने पर मामले में और विवरण सामने आएंगे।

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