नशेड़ी ड्राइवर की लापरवाही से स्कूली बच्चों की जान पर बनी आफत: वेंकटेश्वर सिग्नेचर स्कूल प्रबंधन की संवेदनहीनता और सुरक्षा में चूक पर सवाल

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
रायपुर, 09 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ के आरंग इलाके में विगत 07 जनवरी 2026 दिन बुधवार को अल सुबह एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें वेंकटेश्वर सिग्नेचर स्कूल की वैन ने तेज रफ्तार में एक ट्रक को पीछे से टक्कर मार दी। इस भयानक दुर्घटना में वैन में सवार कई मासूम स्कूली बच्चे बुरी तरह घायल हो गए। घटना की जड़ में ड्राइवर की शराबखोरी बताई जा रही है, लेकिन असली दोषी स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही को माना जा रहा है, जिसने बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रखकर एक नशेड़ी चालक को वाहन सौंप दिया। परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है, और वे प्रबंधन पर बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करने का आरोप लगा रहे हैं।
घटना की पूरी तस्वीर बेहद चौंकाने वाली है। जानकारी के मुताबिक, उमरिया गांव के पास स्थित इस स्कूल की वैन महासमुंद और आरंग इलाके से बच्चों को लेकर जा रही थी। सफेद रंग की यह एसयूवी-स्टाइल वैन (पंजीकरण नंबर CG 06 GRS 5223) सुबह के समय हाईवे पर तेज गति से दौड़ रही थी। चालक और उसके साथी दोनों शराब के नशे में इतने धुत थे कि वाहन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं रहा। अचानक वैन आगे चल रहे एक भारी ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई, जिससे वैन का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। इंजन, बंपर, ग्रिल और विंडशील्ड सब बिखर गए, और सड़क पर मलबे के टुकड़े बिखर पड़े। ट्रक के पीछे लदे सामान की वजह से टक्कर और भी जोरदार हुई, लेकिन शुक्र है कि ट्रक चालक को ज्यादा चोट नहीं आई।
हादसे के तुरंत बाद जो हुआ, वह स्कूल प्रबंधन की असंवेदनशीलता की मिसाल है। घायल बच्चों को फौरन अस्पताल पहुंचाने की बजाय, प्रबंधन ने उन्हें स्कूल कैंपस में ही ले जाने का फैसला किया। यह फैसला बच्चों की हालत को और बिगाड़ सकता था, क्योंकि कई बच्चों के सिर, हाथ-पैर और चेहरे पर गंभीर चोटें आई थीं। कुछ बच्चे सदमे में थे और रो-रोकर सहमे हुए थे। परिजनों को जब इसकी खबर मिली, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। वे स्कूल पहुंचे और प्रबंधन पर जमकर बरसे। एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं कि वे सुरक्षित रहें, लेकिन यहां तो प्रबंधन ने एक शराबी को ड्राइवर बना दिया। क्या बच्चों की जान इतनी सस्ती है?” परिजनों का आरोप है कि स्कूल ने ड्राइवर की जांच-पड़ताल नहीं की, न ही कोई बैकग्राउंड चेक किया, जो कि बच्चों की परिवहन सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
स्कूल प्रबंधन की तरफ से आशीष गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में सफाई दी कि उन्होंने ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है और स्कूल का नाम बदनाम न करने की अपील की। लेकिन परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ लीपापोती है। प्रबंधन ने हादसे की गंभीरता को हल्के में लिया और बच्चों की सेहत पर ध्यान नहीं दिया। वेंकटेश्वर सिग्नेचर स्कूल, जो खुद को “क्रिएट योर ओन सिग्नेचर” जैसे नारे से प्रचारित करता है, अब अपनी ही लापरवाही के कारण सवालों के घेरे में है। स्कूल का भव्य कैंपस और आधुनिक सुविधाएं बच्चों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकतीं, जब प्रबंधन बुनियादी नियमों की अनदेखी करे।
आरंग पुलिस को घटना की सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने ड्राइवर और उसके साथी को हिरासत में लिया है, और उनका मेडिकल टेस्ट कराया जा रहा है ताकि नशे की पुष्टि हो सके। घायल बच्चों को अब स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। लेकिन कई बच्चे अभी भी ट्रॉमा से गुजर रहे हैं, और उनके माता-पिता चिंतित हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस घटना पर रोष जताया है और मांग की है कि स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। वे शिक्षा विभाग से अपील कर रहे हैं कि स्कूल का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए और परिसर को सील कर दिया जाए, ताकि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
यह हादसा न सिर्फ एक दुर्घटना है, बल्कि स्कूली परिवहन में सुरक्षा मानकों की कमी को उजागर करता है। देशभर में ऐसे कई मामले सामने आते हैं जहां नशेड़ी ड्राइवरों या खराब रखरखाव वाली गाड़ियों से बच्चों की जान जोखिम में पड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों को ड्राइवरों की नियमित जांच, अल्कोहल टेस्ट और वाहनों की फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य रूप से लागू करनी चाहिए। इस घटना से सबक लेते हुए, शिक्षा विभाग को सभी स्कूलों की जांच करानी चाहिए ताकि मासूमों की जिंदगी सुरक्षित रहे।
अगर आपके पास इस घटना से जुड़ी कोई जानकारी है या आप प्रभावित हैं, तो स्थानीय पुलिस या शिक्षा विभाग से संपर्क करें। बच्चों की सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है, और ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।



