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महासमुंद CMHO डॉ. आई. नागेश्वर राव का घिनौना भ्रष्टाचार बेनकाब 55 लाख की चार सरकारी बोलेरो को बना दिया “निजी प्राइवेट लिमोज़ीन” और “कबाड़ का ढेर”!

“कागजों में बंट गईं गाड़ियाँ, हकीकत में एक भी ब्लॉक तक नहीं पहुँची” – स्वास्थ्य कर्मियों का दर्द छलका

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्वास्थ्य विभाग का एक ऐसा घोटाला सामने आया है जो न सिर्फ सरकारी लापरवाही की मिसाल है, बल्कि सीधे-सीधे जनता की जान से खिलवाड़ भी। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं रायपुर से जिले को मिली चार नई-नकोर महिंद्रा बोलेरो गाड़ियाँ (कीमत करीब 50-55 लाख रुपए) पिछले 6-7 महीने से CMHO कार्यालय के बाहर पार्किंग में खड़ी-खड़ी धूल और कीचड़ की मोटी परतें चाट रही हैं।
जब जिला कलेक्टर ने सख्ती दिखाते हुए CMHO डॉ. आई. नागेश्वर राव से पूछा,
“ये चारों गाड़ियाँ ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर और नोडल अधिकारियों को दे दी गईं ना?”
तो CMHO साहब ने बिना झिझके जवाब दिया –
“जी सर, सब दे दी गई हैं।”
लेकिन हकीकत देखिए:

चार में से तीन गाड़ियाँ आज भी CMHO ऑफिस के बाहर टिनशेड के नीचे खड़ी हैं।

इन पर इतनी मोटी धूल जमी है कि नंबर प्लेट भी साफ नहीं दिख रही।

चौथी गाड़ी..? वो तो बड़े साहब अपने निजी और परिवार के कामों में इस्तेमाल कर रहे हैं – सूत्रों का सनसनीखेज दावा!

जब पत्रकारों ने खोदकर देखा तो जो निकला, उससे रोंगटे खड़े हो गए:

किसी भी पांचों ब्लॉक (महासमुंद, बागबाहरा, बसना, पिथौरा, सरायपाली) में एक भी नई बोलेरो नहीं पहुँची।
जिला नोडल अधिकारी, RCH अधिकारी, डेटा मैनेजर, टीकाकरण टीम – सब आज भी अपनी जेब से पेट्रोल डालकर निजी गाड़ी या बाइक से गांव-गांव भटक रहे हैं।
एक स्वास्थ्य कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “साहब ने सिर्फ फाइल में लिख दिया कि गाड़ी दे दी। असल में चाबी तक किसी को नहीं दी गई हो, ऐसा कोई सबूत नहीं।”

कलेक्टर को दी गई झूठी रिपोर्ट

– अब जांच जरूरी!
जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने CMHO से साफ-साफ रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन CMHO कार्यालय ने जो जवाब दिया, वो पूरी तरह झूठा निकला। अब सवाल यह है कि
क्या जानबूझकर कलेक्टर को गुमराह किया गया?
क्या ये सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग और धोखाधड़ी का मामला है?

गाड़ियाँ खराब होने की कगार पर
– जनता भुगतेगी कीमत

नई गाड़ियाँ खड़ी-खड़ी बैटरी डाउन, टायर फटने, पेंट उड़ने की स्थिति में पहुँच गई हैं।
बारिश में पानी भर गया, अब इनमें जंग लगना शुरू हो गया है।
अगर यही हाल रहा तो एक-दो महीने में ये गाड़ियाँ कबाड़ बन जाएंगी – और फिर नई गाड़ी के लिए फिर बजट मांगेंगे!

स्वास्थ्य कर्मियों का दर्द:

“हम कुपोषण सर्वे, टीकाकरण, प्रसव पूर्व जाँच के लिए 50-60 किलोमीटर रोज चलते हैं। जेब से पेट्रोल डालो, गाड़ी खराब हो तो खुद ठीक कराओ। ऊपर से CMHO साहब को लगता है हम आराम कर रहे हैं। गाड़ी है ही नहीं तो हम कैसे जाएँ?”

अब जनता पूछ रही है

CMHO साहब ने कलेक्टर को झूठ क्यों बोला?
चौथी बोलेरो किसके निजी काम में चल रही है?
कब तक ये गाड़ियाँ धूल खाती रहेंगी?
क्या जिला कलेक्टर इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाएंगे?
जिले के स्वास्थ्य कर्मी और आम जनता अब खुलकर मांग कर रहे हैं –
तत्काल चार्जशीट, गाड़ियों का मीटर चेक कराओ, और सभी गाड़ियाँ 48 घंटे में संबंधित ब्लॉकों को सौंप दी जाएं।
अगर ऐसा नहीं हुआ तो ये मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और आपराधिक विश्वासघात का केस बनेगा।
अब देखना ये है कि जिला कलेक्टर इस “धूल भरी बोलेरो घोटाले” पर कब एक्शन लेता है…
या फिर ये गाड़ियाँ यूं ही कब्रिस्तान बनकर रह जाएंगी?

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