ट्रंप का ‘टैरिफ वार’ खत्म, मोदी की ‘दोस्ती’ शुरू: अमेरिका ने भारतीय सामान पर घटाई दीवारें; क्या अब आपकी जेब पर पड़ेगा असर?

0
3

नई दिल्ली/वॉशिंगटन (ब्यूरो): आज सुबह जब दलाल स्ट्रीट पर ट्रेडिंग की घंटी बजी, तो माहौल में एक अलग ही करंट था। वजह थी वॉशिंगटन से आई वह खबर, जिसका इंतजार भारतीय एक्सपोर्टर्स और शेयर बाजार पिछले कई महीनों से कर रहे थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई 40 मिनट की फोन कॉल के बाद, अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगाए गए सख्त ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को 50% से घटाकर 18% करने का ऐलान कर दिया है।

वो क्या था, जिसने बाजी पलट दी? (Original Angle) आमतौर पर ट्रंप अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार ‘मोदी मैजिक’ काम कर गया। जानकारों का कहना है कि भारत ने अमेरिका से बड़ी मात्रा में ‘शेल गैस’ और ‘एग्रो प्रोडक्ट्स’ खरीदने का जो भरोसा दिया, उसने ट्रंप का दिल जीत लिया। यह समझौता केवल व्यापार नहीं, बल्कि चीन को वैश्विक सप्लाई चेन से बाहर धकेलने की एक सोची-समझी रणनीतिक चाल है।

बाजार का ‘सुनामी’ जैसा उछाल (Reporting Feel) खबर आते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 3,100 अंकों की छलांग लगाकर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। सूरत के कपड़ा व्यापारी हों या बेंगलुरु के आईटी प्रोफेशनल, हर कोई इस डील में अपना मुनाफा देख रहा है। रिलायंस, टाटा मोटर्स और विप्रो जैसे शेयरों में आज ऐसी खरीदारी देखी गई जैसे कोई दिवाली का सेल हो।

ग्राउंड रिपोर्ट: क्या बदलेगा आपके लिए? (Human Touch) सूरत के एक कपड़ा निर्यातक, महेश भाई ने ‘बेबाक बयान’ से बात करते हुए कहा— “पिछले साल टैरिफ बढ़ने से हमारे गोदाम माल से भरे पड़े थे, ऑर्डर कैंसिल हो रहे थे। आज की इस खबर ने हमें नई जिंदगी दी है। अब हम गर्व से ‘मेड इन इंडिया’ लेबल के साथ अमेरिकी मॉल्स में मुकाबला कर पाएंगे।” इस डील का सीधा असर केवल बड़े घरानों पर नहीं, बल्कि उन लाखों कारीगरों पर पड़ेगा जो हस्तशिल्प, जेम्स और ज्वेलरी के काम से जुड़े हैं। सस्ते निर्यात का मतलब है—ज्यादा ऑर्डर, ज्यादा काम और बेहतर मजदूरी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here