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माँ मातंगी दिव्य धाम में उमड़ा जनसैलाब: राष्ट्रीय गौरव रथ के स्वागत में गूंजा शिवगौरव और राष्ट्रभक्ति का जयघोष

 

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
धमतरी। जिले के कुरूद विकासखंड अंतर्गत ग्राम जी-जमगांव स्थित माँ मातंगी दिव्य धाम उस समय आस्था, आध्यात्म और राष्ट्रभक्ति के विराट संगम का साक्षी बना, जब राष्ट्रीय गौरव रथ का भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय ऊर्जा से भर दिया। अनुमानतः 20 से 25 हजार लोगों ने इस आयोजन में सहभागिता कर इसे जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया।
धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमा साई जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस समारोह ने केवल धार्मिक आयोजन का ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना के संदेश का भी प्रभावी मंच प्रदान किया। माँ मातंगी दिव्य धाम, जिसे त्रिकाल दर्शी धाम के रूप में भी पहचान मिली है, वर्षों से आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

राष्ट्र जागरण और सांस्कृतिक चेतना का संदेश

मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. प्रेमा साई जी महाराज ने कहा कि देश की नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों के जीवन मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि महान विभूतियों के जीवन, त्याग और योगदान को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में उचित स्थान दिया जाए, ताकि युवाओं में राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक आत्मगौरव की भावना सशक्त हो सके।
कार्यक्रम के अंतर्गत सायं 5 बजे राष्ट्रीय गौरव रथ का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। इसके पश्चात भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भजन-कीर्तन, जयघोष और ढोल-नगाड़ों की गूंज से पूरा परिसर देर रात तक जीवंत बना रहा। रात्रि 11 बजे तक कार्यक्रम निरंतर चलता रहा और श्रद्धालुओं की आस्था का उत्साह देखते ही बनता था।

नासिक से जगन्नाथ पुरी तक राष्ट्रीय गौरव रथयात्रा

उल्लेखनीय है कि ‘राष्ट्रीय शिव जन्मोत्सव सोहळा 2026’ के अंतर्गत छावा भारत क्रांति मिशन द्वारा यह राष्ट्रीय गौरव रथयात्रा निकाली गई। यात्रा की शुरुआत कालिका माता मंदिर से 14 फरवरी को हुई। रथयात्रा सिन्नर, शिरडी, छत्रपति संभाजीनगर, नागपुर और रायपुर सहित विभिन्न नगरों से गुजरते हुए अंततः पुरी पहुँची, जहां 19 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय शिव जन्मोत्सव समारोह संपन्न हुआ।
इस रथयात्रा में छत्रपति शिवाजी महाराज की अक्षत प्रतिमा को साथ लेकर देशभर में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक एकता का संदेश प्रसारित किया गया। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत कर शिवाजी महाराज के आदर्शों को स्मरण किया और उनके शौर्य, पराक्रम तथा राष्ट्रनिष्ठा से प्रेरणा लेने का संकल्प दोहराया।

छत्तीसगढ़ की धरती पर ऐतिहासिक क्षण

माँ मातंगी दिव्य धाम में आयोजित स्वागत समारोह को आयोजकों ने छत्तीसगढ़ की धरती के लिए गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण बताया। कार्यक्रम ने यह सिद्ध किया कि जब आस्था और राष्ट्रभाव एक साथ प्रवाहित होते हैं, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संचार होता है।
राष्ट्रीय गौरव रथ का यह पड़ाव न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक बना, बल्कि सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्रीय एकात्मता का भी सशक्त संदेश देकर आगे बढ़ा।

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