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महासमुंद धान खरीदी संकट: उठाव ठप, जगह खत्म, किसान कर्ज के जाल में फंसे – सरकार मौन क्यों..?

 

तत्काल कार्रवाई करो, वरना आंदोलन तय..!

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद / जिले में धान खरीदी केंद्रों पर इन दिनों हाहाकार मचा हुआ है। सरकारी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी तो जोरों पर है, लेकिन उठाव की भयंकर देरी ने पूरी व्यवस्था को लकवा मार दिया है। केंद्रों पर धान के ढेर लगातार ऊंचे होते जा रहे हैं, जबकि मिलों या गोदामों तक पहुंचाने के लिए ट्रक या संसाधन नदारद। केंद्र प्रभारियों के चेहरे पीले पड़ गए हैं – वे जानते हैं कि अगले 4-5 दिनों में स्टोरेज की जगह पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, और खरीदी बंद करने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। इससे समितियां करोड़ों के घाटे में चली जाएंगी, और सबसे बड़ा नुकसान होगा उन किसानों का, जिन्होंने बैंक से कर्ज लेकर धान की फसल उगाई है।

सरकार द्वारा तय खरीदी लिमिट के अनुसार ही धान लिया जा रहा है, लेकिन इस लिमिट को बढ़ाने की कोई घोषणा नहीं। नतीजा – लक्ष्य अधर में लटक गया। स्टैकिंग तो हो रही है, मगर उठाव न होने से जगह की किल्लत चरम पर है। मिलर्स द्वारा सप्लाई किए बारदानों की हालत और बुरी – 50% अच्छे, बाकी फटे-चीथड़े, फिर भी पूरा पैसा वसूला जा रहा। एक केंद्र प्रभारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया, “हम लोग बेहद परेशान हैं। समय पर उठाव नहीं हुआ तो समिति इस बार दिवालिया हो जाएगी। बारदाना, रखरखाव और अन्य खर्चे बढ़ते जा रहे हैं।”

किसानों की स्थिति तो और भी विकट है। हजारों किसानों का टोकन अभी तक नहीं कटा, और एग्रीस्टैक पोर्टल पर ऑनलाइन स्लॉट 16 से 20 जनवरी तक पूरी तरह बुक हो चुके हैं। एक किसान ने दर्द भरी आवाज में कहा, “कर्ज लेकर बोवनी की, धान तैयार है, लेकिन बेचने का नंबर नहीं आ रहा। 31 जनवरी के बाद क्या फरवरी में खरीदी होगी? सरकार स्पष्ट बताए, वरना हम सड़कों पर उतरेंगे।” कई किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं – फसल खराब होने का डर, कर्ज का ब्याज बढ़ना, और परिवार का पेट पालने की चिंता।

यह समस्या सिर्फ महासमुंद की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगा रही है। लॉजिस्टिक्स की कमी, मिलिंग कैपेसिटी की सीमितता, बारदाना गुणवत्ता और पोर्टल की गड़बड़ियां सालों से चली आ रही हैं, लेकिन समाधान दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर तत्काल उठाव तेज नहीं किया गया, तो बड़ा प्रदर्शन होगा।
शासन-प्रशासन से सीधी अपील:

1 उठाव के लिए अतिरिक्त ट्रक और संसाधन तुरंत लगाएं।

2 खरीदी लिमिट बढ़ाएं और फरवरी तक खरीदी जारी रखने की आधिकारिक घोषणा करें।

3 बारदाना की गुणवत्ता जांचें और दोषी मिलर्स पर कार्रवाई करें।

4 टोकन और स्लॉट की समस्या का स्थायी हल निकालें।

किसानों की मेहनत और उनके कर्ज का बोझ देखते हुए अब चुप्पी नहीं चलेगी। सरकार जागे, तुरंत कार्रवाई करे, वरना यह संकट पूरे प्रदेश में आग की तरह फैलेगा। क्या मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री इस पुकार को सुनेंगे? समय कम है, फैसला अब होना चाहिए!

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