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महासमुंद उप संचालक कृषि विभाग में पदस्थ डिप्टी डायरेक्टर एफ.आर. कश्यप की मनमानी बेनकाब..!

 

ट्रांसफर ऑर्डर को ठेंगा दिखाकर चहेते जितेंद्र पटेल को फिर ऑफिस बिठाया, अनुदान घोटाले की साठगांठ फिर शुरू – कृषि मंत्री और कलेक्टर अब भी खामोश..?

शासकीय आदेशों की अवहेलना अब मौखिक आदेश के दमपर अधिकारियों का दबदबा

रिपोर्टर मयंक गुप्ता
महासमुंद 29 दिसंबर 2025 छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कृषि विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार कारण है खुली तानाशाही और सरकारी नियमों की बेखौफ अवहेलना। उप संचालक कृषि फागुराम कश्यप (एफआर कश्यप) पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे खुद को ‘जिले का राजा’ समझकर चल रहे हैं और लिखित ट्रांसफर आदेश को पूरी तरह नजरअंदाज कर अपने चहेते कर्मचारी जितेंद्र पटेल को मौखिक निर्देश देकर रोजाना कार्यालय में बुला रहे हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि पटेल अब भी महासमुंद मुख्यालय में आते हैं, अनुदान योजनाओं की महत्वपूर्ण फाइलें हैंडल करते हैं और शाम को चले जाते हैं – जैसे उनका ट्रांसफर हुआ ही न हो!
यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी का ट्रांसफर नहीं, बल्कि विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और साठगांठ की गहरी जड़ों को उजागर कर रहा है। कर्मचारियों और किसानों में भारी आक्रोश है, क्योंकि अनुदान वितरण में फिर से देरी, कटौती और कमीशनबाजी की शिकायतें सामने आ रही हैं।

ट्रांसफर आदेश कागज पर, हकीकत में मौखिक ‘हुकुम..’!

पृष्ठभूमि याद करें तो अक्टूबर 2025 में छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने जितेंद्र पटेल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया था। आरोप थे – मैदानी कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार, मानसिक प्रताड़ना और लंबे समय से मुख्यालय में ‘आरामदायक अटैचमेंट’। पटेल पिछले 13 वर्षों से महासमुंद कार्यालय में अटैच थे, जबकि उनका मूल पदस्थापन पिथौरा था।
संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल और दबाव के बाद विभाग ने 2016 के पुराने निर्देशों का हवाला देकर पटेल का ट्रांसफर आदेश जारी किया। संघ ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। लेकिन अब सूत्रों का दावा है कि उप संचालक कश्यप ने सब कुछ पलट दिया। मौखिक रूप से पटेल को बुलावा भेजा जा रहा है और वे नियमित रूप से ऑफिस आकर काम निपटा रहे हैं।
एक अनाम विभागीय सूत्र ने कहा, “लिखित आदेश तो कूड़ेदान में डाल दिया गया। कश्यप साहब की मौखिक ‘राज’ चल रही है। अनुदान फाइलें फिर वही पुराने हाथों में हैं, जहां कमीशन का खेल पहले भी चलता था। किसानों का नुकसान हो रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं।”

पुराने आरोपों की काली छाया: गरियाबंद से महासमुंद तक फर्जीवाड़े का सिलसिला..?

फागुराम कश्यप पहले गरियाबंद जिले में पदस्थ थे, जहां मैनपुर ब्लॉक में मिनी राइस मिल किट वितरण योजना में फर्जी बिल लगाकर सरकारी पैसा आहरण करने के गंभीर आरोप लगे थे। सूत्र बताते हैं कि इसी मामले में उन्हें निलंबित किया गया था, जिसके बाद ट्रांसफर महासमुंद में हुआ। अब यहां भी उनकी कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कश्यप और पटेल की यह ‘भ्रष्ट जोड़ी’ अनुदान योजनाओं में पुरानी साठगांठ फिर से सक्रिय कर रही है, जिससे किसानों को सीधा नुकसान पहुंच रहा है।
किसानों की शिकायतें बढ़ी हैं – अनुदान में अनावश्यक देरी, बिना वजह कटौती और फाइलें अटकाना। एक प्रभावित किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “पहले हड़ताल से कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब फिर वही हालात। फाइलें घूम-घूमकर वही पुराने लोगों के पास पहुंच रही हैं। हमारा हक मारकर कमीशनबाजी हो रही है।”

कर्मचारी फिर आक्रोशित: नई हड़ताल की तैयारी..?

संघ के पदाधिकारियों में भारी निराशा है। एक पदाधिकारी ने कहा, “हमने इतना संघर्ष किया, ट्रांसफर हुआ, लेकिन मौखिक बुलावे से सब व्यर्थ हो गया। यह विभाग की गरिमा और सरकारी नियमों का खुला मजाक है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो फिर अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी। कर्मचारी एकजुट हैं और इस मनमानी को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

अपील: कृषि मंत्री और कलेक्टर से त्वरित एक्शन की गुहार..!

यह मामला अब बेहद गंभीर हो चुका है। सरकारी आदेश की खुली अवमानना, मौखिक मनमानी और कथित भ्रष्टाचार पर उच्च स्तरीय जांच जरूरी है। विभागीय सूत्रों का मानना है कि अगर जांच हुई तो कई बड़े खुलासे होंगे।
कृषि मंत्री और महासमुंद जिला कलेक्टर से अपील है कि तत्काल संज्ञान लें और निम्न कदम उठाएं:
जितेंद्र पटेल के मौखिक बुलावे और ऑफिस आने-जाने पर तुरंत रोक लगाएं।
फागुराम कश्यप की कार्यशैली पर स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच कराएं।
सभी अनुदान योजनाओं का फौरन ऑडिट करवाएं और पारदर्शिता सुनिश्चित करें।
नियमों की अवहेलना करने वालों पर सख्त विभागीय कार्रवाई करें।
अगर जल्द एक्शन नहीं हुआ तो विभाग में फिर हड़ताल भड़केगी और किसानों का आक्रोश सड़कों पर उतरेगा। ‘राजा’ की यह तानाशाही कब तक चलेगी? महासमुंद के कर्मचारी और किसान अब इंसाफ की राह देख रहे हैं।
एफआर कश्यप और जितेंद्र पटेल से बार-बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। मामला संवेदनशील है और आगे की अपडेट के लिए नजर रखी जा रही है।

समर्थन मूल्य धान खरीदी में अभी एफ आर कश्यप जिला नोडल अधिकारी बने है।

सूत्र बताते है कि, जबसे इनको जिले का नोडल नियुक्त किया गया है ये धान खरीदी समितियों में प्रभारियों को खुले आम डिमांड करते है। नहीं करने पर हर गतिविधियों में पैनी नजर गड़ाए बैठे रहते है। जहां इनका जेब गरम हुआ बिना कुछ बोले चुपचाप निकल जाते है।

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